google-site-verification=B9Lq8jOTFEhzkvK3s-RAmbejwbm0VKaXV3m9BtyrNK4 https://www.profitablecpmrate.com/gtfhp9z6u?key=af9a967ab51882fa8e8eec44994969ec 2. आध्यात्मिकता का नशा की संगत भाग 1

ज्येष्ठ मास :

ज्येष्ठ मास :

ज्येष्ठ मास का महत्त्व एवं पर्व त्यौहार :

श्री वैदिक ज्योतिषशास्त्रविद्या, श्री खगोलशास्त्रविद्या, श्री ऋग्वेद, श्री यजुर्वेद, श्री सामवेद, श्री शिवमहापुराण एवं श्री विष्णु महापुराण के अनुसार ज्येष्ठ मास का महात्म्य, ग्रह दोषों के फल एवं उपाय हिन्दू पंचाग के अनुसार ज्येष्ठ मास हिन्दू वर्ष का तीसरा माह है ! 

हिन्दी माह में हर माह की एक विशेषता रही है. सभी की कोई न कोई खासियत होती ही है. जीवन में आने वाले उतार - चढा़वों में ये सभी माह कोई न कोई महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करते ही हैं ! 

मौसम में होने वाले जबरदस्त बदलाव को भी इन सभी 12 माह के दौरान देखा जा सकता है। 
सनातन धर्म में प्रत्येक मास का अपना विशेष महत्व है, परंतु ज्येष्ठ मास को तप, दान, जलसेवा, भगवान शिव, भगवान विष्णु तथा सूर्य नारायण की विशेष उपासना का महीना माना गया है। 




वैदिक ग्रंथों, पुराणों तथा ज्योतिषशास्त्र में वर्णित है कि इस मास में किए गए पुण्य कर्म अनेक गुना फल प्रदान करते हैं। 

जन्मकुंडली एवं प्रश्नकुंडली में यदि ग्रह दोष हों, तो ज्येष्ठ मास में किए गए धार्मिक अनुष्ठान उनके अशुभ प्रभाव को कम करने में सहायक माने जाते हैं।

इस वर्ष ज्येष्ठ मे अधिक मास आने के कारण यह मास बढ़कर 2 माह ( 59 ) दिन का हो गया है।

ऋग्वेद में सूर्य को समस्त जगत का आत्मा कहा गया है। 

यजुर्वेद में यज्ञ, तप और दान की महिमा का वर्णन मिलता है ! 


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जबकि सामवेद ईश्वर भक्ति और स्तुति के माध्यम से मन की शुद्धि का संदेश देता है। 
शिवमहापुराण में भगवान शिव की आराधना से ग्रहजनित कष्टों के शमन का वर्णन है तथा विष्णु महापुराण में भगवान विष्णु की भक्ति को जीवन के समस्त दुःखों से मुक्ति का श्रेष्ठ साधन बताया गया है।

ज्येष्ठ माह को सबसे गर्म माह की श्रेणी में रखा जाता है. इसे सामान्य बोल - चाल की भाषा में जेठ का महीना भी कहा जाता है ! 

क्योंकि ये सबसे गर्म महीना होता है ! 

इसी माह में सबसे अधिक ऎसी वस्तुओं के दान की बात कही जाती है जो ठंडक और छाया देने वाली होती हैं जैसे कि - छाता, पंखा, पानी इत्यादि वस्तुओं का दान देने की जरुरत होती ही है।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार जन्मकुंडली में सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु यदि अशुभ स्थिति में हों तो जीवन में अनेक प्रकार की बाधाएँ उत्पन्न होती हैं। 

प्रश्नकुंडली वर्तमान समय की परिस्थितियों का संकेत देती है और उसके आधार पर भी उपयुक्त उपाय किए जाते हैं। 

ज्येष्ठ मास इन उपायों के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।

ज्येष्ठ माह में विशेष रुप से गंगा नदी में स्नान और पूजन करने का विधि - विधान है. इस माह में आने वाले पर्वों में गंगा दशहरा और इस माह में आने वाली ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी और निर्जला एकादशी प्रमुख पर्व है ! 

गंगा नदी का एक अन्य नाम ज्येष्ठा भी है. गंगा को गुणों के आधार पर सभी नदियों में सबसे उच्च स्थान दिया गया है।

यदि जन्मकुंडली में सूर्य दोष हो तो व्यक्ति को मान - सम्मान की कमी, पिता से मतभेद, सरकारी कार्यों में बाधा तथा आत्मविश्वास की कमी का अनुभव हो सकता है। 

ज्येष्ठ मास में प्रतिदिन प्रातःकाल तांबे के पात्र से सूर्य को जल अर्पित करना, आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना तथा गेहूँ, गुड़ और लाल वस्त्र का दान करना शुभ माना गया है।
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ज्येष्ठ माह के व्रत व त्यौहार :

ज्येष्ठ मास के त्यौहारों में गंगा दशहरा, निर्जला एकादशी, वटसावित्री व्रत, ज्येष्ठ पूर्णिमा, योगिनी एकादशी जैसे त्यौहार मनाए जाते हैं. इन त्यौहारों का महत्व ही हमारे जीवन में एक नई चेतना और विकास देने वाला होता है ! 
इस माह के दौरान तीर्थ स्थलों पर जाकर नदियों में स्नान करने और लोगों को ठंडा पानी इत्यादि बांटा जाता है ! 
जग - जगह पर लोगों को पानी पिलाने के लिए मटकों इत्यादि की व्यवस्था भी की जाती है।

चंद्र दोष :

चंद्र दोष होने पर मानसिक अशांति, भय, अनिद्रा, निर्णय लेने में कठिनाई तथा माता के स्वास्थ्य से संबंधित समस्याएँ हो सकती हैं। 
ऐसे जातक सोमवार को भगवान शिव का जलाभिषेक करें, दूध और चावल का दान करें तथा "ॐ सोम सोमाय नमः" मंत्र का जप करें।
इस माह के दौरान मौसम का प्रकोप इतना अधिक प्रचंड रहता है कि मनुष्य तो क्या जीव जन्तु भी इस समय में गर्मी की अधिकता से व्याकुल हो जाते हैं. ऎसे में इस तपन को शांत करने के लिए ही पशु - पक्षिओं के लिए पानी इत्यादि की व्यवस्था की जाती है. लोग मीठा पानी इत्यादि चीजों को सभी में बांटते हैं।
मंगल दोष विवाह में विलंब, भूमि विवाद, दुर्घटना, क्रोध तथा रक्त संबंधी रोगों का कारण बन सकता है। 
ज्येष्ठ मास में मंगलवार को हनुमानजी की पूजा, सुंदरकाण्ड का पाठ, मसूर की दाल का दान तथा लाल चंदन अर्पित करना लाभदायक माना गया है।
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गंगा दशहरा :

गंगा दशहरा पृथ्वी पर पवित्र नदी गंगा के आगमन होने के उपलक्ष पर मनाया जाता है. इस त्यौहार के समय गंगा पूजन और व्रत इत्यादि करने का विशेष महत्व रहा है. साथ ही गंगा नदी में स्नान का विशेष महत्व माना जाता है ! 

इस के साथ ही इस दिन जप - तप - दान का भी बहुत महत्व माना गया है. ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन गंगा स्नान करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है।

गंगा नदी को भारत में एक बहुत ही पवित्र नदी के रुप में पूजा जाता है. जन्म से मृत्य तक के सभी कर्मों में गंगा की महत्ता सभी के समक्ष उल्लेखनीय भी रही है ! 

जब माँ गंगा धरती पर आती हैं तो वो दिन ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी का था इस लिए गंगा के पृथ्वी पर अवतरण के दिन को ही गंगा दशहरा के नाम से मनाया जाता है !

बुध दोष :

बुध दोष शिक्षा, व्यापार, वाणी और बुद्धि पर प्रभाव डालता है। 
बुधवार को भगवान विष्णु की पूजा, हरी मूंग का दान, तुलसी की सेवा तथा विष्णु सहस्रनाम का पाठ शुभ फल प्रदान करता है।

निर्जला एकादशी :

ज्येष्ठ मास का एक अन्य महत्वपूर्ण त्यौहार निर्जला एकादशी है. यह त्यौहार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन संपन्न होता है. निर्जला एकादशी के दिन व्रत एवं पूजा पाठ करने का नियम भी रहता है ! 
इस दिन देश भर में लोगों को, राहगीरों को मीठा पानी पिलाया जाता है जिसे कुछ स्थानों पर छबील भी कहा जाता है ! 
इस एकादशी के दिन भी तीर्थ स्थलों पर स्नान करने का विशेष महत्व रहा है. इस दिन भगवान श्री विष्णु की पूजा कि जाती है. इस दिन किए गए जप - तप और दान का कई गुना फल मिलता है।
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गुरु दोष :

गुरु दोष होने पर संतान सुख में बाधा, ज्ञान की कमी, विवाह में विलंब तथा आर्थिक परेशानियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। 
गुरुवार को पीले वस्त्र धारण करना, चने की दाल और हल्दी का दान, केले के वृक्ष की पूजा तथा बृहस्पति मंत्र का जप करना हितकारी माना गया है।

वटसावित्री व्रत :

ज्येष्ठ माह की अमावस्या को वट सावित्री व्रत रुप में मनाया जाता है. ये व्रत सौभाग्य की वृद्धि करने वाला होता है. वट के वृक्ष को हिंदू धर्म में विशेष स्थान प्राप्त है. इस वृक्ष पर ब्रह्मा, विष्णु व महेश तीनों का वास माना गया है ! 
इसी के समक्ष सावित्री और सत्यवान की कथा का श्रवण किया जाता है और पूजन, व्रत कथा श्रवण आदि के पश्चात व्रत संपन्न होता है।

शुक्र दोष :

शुक्र दोष दाम्पत्य जीवन, सुख - सुविधाओं, कला, सौंदर्य और धन पर प्रभाव डालता है। 
शुक्रवार को माता लक्ष्मी की पूजा, सफेद मिठाई का दान, कन्याओं का सम्मान तथा सुगंधित पुष्प अर्पित करना शुभ माना गया है।

ज्येष्ठ पूर्णिमा :

ज्येष्ठ माह कि पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है. इस दिन प्रात:काल समय पर पवित्र नदी या घर पर ही स्नान करने के पश्चात पूजा - पाठ किया जाता है. ब्राह्मण को भोजन कराना, गरीबों को दान करना और सत्यनारायण कथा श्रवण करना मुख्य कार्य होते हैं ये सभी इस पूर्णिमा के दिन किए जाने पर व्यक्ति के शुभ कर्मों में वृद्धि होती है ! 
पौराणिक मान्यताओं अनुसार भी यह माह बहुत गर्म माह होता है ऐसे में इस माह में पूर्णिमा के दिन जल का दान अत्यंत उत्तम फल प्रदान करने वाला होता है ! 
इस दान के अलावा गरीबों को खाना खिलाने और वस्त्र इत्यादि वस्तुओं का दान देने का भी अक्षय फल मिलता है. ज्येष्ठ पूर्णमा के दिन संत कबीर का भी जन्म दिवस मनाया जाता है।
शनि दोष जीवन में संघर्ष, देरी, नौकरी की समस्या, ऋण तथा न्यायालय संबंधी कठिनाइयों का कारण बन सकता है। 

शनिवार को पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाना, तिल के तेल का दान, काले तिल अर्पित करना तथा "ॐ शं शनैश्चराय नमः" मंत्र का जप करना लाभकारी माना गया है।

ज्येष्ठ मास में जन्मे व्यक्ति स्वभाव :

ज्येष्ठ माह में जन्मे जातक के विषय में ज्योतिष ग्रंथों में बहुत सी बातें कहीं गई हैं. जैसे कि जिस व्यक्ति का जन्म ज्येष्ठ मास में हुआ हो, उस व्यक्ति को परदेश में रहना पडता है ! 
उसे विदेश से लाभ मिल सकता है. अपने घर से दूर रहने की प्रवृत्ति भी देखी जा सकती है. ऎसा व्यक्ति शुद्ध विचार युक्त होता है ! 
उसके मन में किसी के लिए किसी प्रकार का कोई बैर - भाव नहीं रहता है. इस योग से युक्त व्यक्ति धन से समृद्ध होता है. उसकी आयु दीर्घ होती है. बुद्धि को उतम कार्यों में लगाने की प्रवृति उसमें होती है।

राहु दोष :

राहु दोष भ्रम, मानसिक तनाव, अचानक हानि, नशे की प्रवृत्ति तथा सामाजिक विवाद उत्पन्न कर सकता है। 
भगवान शिव का रुद्राभिषेक, नारियल का दान, दुर्गा सप्तशती का पाठ तथा गरीबों को भोजन कराना शुभ माना जाता है।
जातक में गंभीरता होती है. वह क्रोध और कुछ जिद अधिक करने वाला हो सकता है. मेहनत से भाग्य का निर्माण करने वाला और जीवन के संघर्षों के प्रति जागरुक भी होता है. वह कोशिश करता है की अपने प्रयासों से दूसरों के लिए और खुद के लिए कुछ बेहतर कर सके।

केतु दोष :

केतु दोष आध्यात्मिक भ्रम, अचानक रोग, संतान संबंधी चिंता तथा मानसिक अस्थिरता दे सकता है। भगवान गणेश की पूजा, कुत्तों को भोजन कराना, तिल और कंबल का दान तथा गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करना लाभकारी माना गया है।

विशेष:👉 इस माह के विषय में धर्म ग्रंथों में भी विशेष रुप से बहुत कुछ लिखा गया है ! 
भारतीय सभयता के हर चीज के पिछे कोई न कोई महत्वपूर्ण बात छुपी हुई है और जो भी नियम या जो कुछ भी बताया गया है ! 
उसके पिछ एक मजबूत तर्क का आधार भी मौजूद रहता है ! 
ऎसे में इस माह में गर्मी अपने चरम पर होती है और इस कारण पानी के महत्व को इस माह से जोड़ा गया है!  
इसी समय पर प्यासों को पानी पिलाने की और सेवा भाव की भावना पर बल दिया गया है। 
ज्येष्ठ मास में निर्जला एकादशी का विशेष महत्व है। 
इस दिन भगवान विष्णु का पूजन, व्रत, दान और जलसेवा करने से अनेक जन्मों के पाप क्षीण होते हैं तथा ग्रहों की अशुभता में भी कमी आती है। 
इसी प्रकार वट सावित्री व्रत सुहागिन स्त्रियों के लिए अत्यंत पवित्र माना गया है। 
इससे दाम्पत्य जीवन में सुख और दीर्घायु की कामना की जाती है।


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शिवमहापुराण के अनुसार ज्येष्ठ मास में शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और आक के पुष्प अर्पित करने से अनेक प्रकार के दोष शांत होते हैं। 
विशेषकर यदि जन्मकुंडली में चंद्र, राहु, केतु या शनि के कारण मानसिक एवं पारिवारिक कष्ट हों, तो रुद्राभिषेक अत्यंत शुभ माना गया है।

विष्णु महापुराण में कहा गया है कि इस मास में तुलसी की सेवा, श्रीहरि का स्मरण, विष्णु सहस्रनाम का पाठ और गौसेवा करने वाला व्यक्ति भगवान की विशेष कृपा प्राप्त करता है। 
गौमाता को हरा चारा, गुड़ और रोटी खिलाना अत्यंत पुण्यदायक माना गया है।

ज्येष्ठ मास के विशेष दिवसो की सूची :

02   👉 प्रथम ( शुद्ध ) ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष आरम्भ।

03 👉 श्री नारद जन्मोत्सव ( वीणादान )।

04  👉 माँ आनन्दमयी जयन्ती,।

05  👉 अँगारकी संकष्ट चतुर्थी, बुढ़वा मंगल।

07  👉 रविन्द्रनाथ टैगोर जयन्ती।

09  👉 कालाष्टमी।

10  👉 पंचक प्रारम्भ 12:12 से, संत दादू दयाल पुण्य दिवस।

12  👉 बुढ़वा मंगल।

13  👉 अपरा एकादशी व्रत ( सबका )।

14  👉 पंचक समाप्त 22:33 पर, प्रदोष व्रत, वट सावित्री व्रत आरम्भ, मधूसूदन द्वादशी।

15  👉 मासिक शिवरात्रि, ज्येष्ठ संक्रान्ति सूर्य वृष में 06:20 से ( पुण्यकाल प्रातः 06:20 से दोपहर 12:35 तक ), सावित्री चतुर्दशी ( बंगाल ), चतुर्दशी तिथिक्षय,।

16  👉 श्री शनैश्चर जयन्ती, देव-पितृ कार्य हेतु ज्येष्ठ भावुका अमावस्या, वट सावित्री वर्त पूर्ण, संत ज्ञानेश्वर महाराज जयन्ती।

17  👉 पुरूषोत्तम अधिक मास आरम्भ, श्री गंगा दशाश्वमेद्य काशी स्नान आरम्भ।

18  👉 चन्द्रदर्शन।

19  👉 विनायक अंगारकी चतुर्थी, बुढ़वा मंगल।

21  👉 गुरू पुष्य योग सूर्योदय से 26:49 तक।

22   👉 राष्ट्रीय ज्येष्ठ मास आरम्भ, राजा राम मोहन राय जयन्ती।

23  👉 दूर्गाष्टमी, सप्तमी तिथि क्षय।

25  👉 श्री गंगा दशहरा, रोहिणी तपन काल ( नौतपा ) आरम्भ।

26  👉 बुढ़वा मंगल।

27  👉 पुरूषोत्तमा ( कमला ) एकादशी व्रत ( सबका )।


30  👉 श्री सत्यनारायण ( पूर्णिमा ) व्रत।

31  👉 स्नान - दान हेतु ज्येष्ठ पुरूषोत्तम मास पूर्णिमा।

01  👉 द्वितीय ( अधिक ) ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष आरम्भ।

02  👉 बुढ़वा मंगल।

03  👉 ज्येष्ठ अधिक मास संकष्ट चतुर्थी व्रत।

05  👉 विश्व पर्यावरण दिवस।

06  👉 पंचक आरम्भ 19:03 से।


08  👉 कालाष्टमी।

09  👉 बुढ़वा मंगल।

11  👉 पुरूषोत्तमा ( कमला ) एकादशी व्रत ( सबका ), पंचक समाप्त 08:16 पर।


13  👉 मासिक शिवरात्रि।

14  👉 पितृ कार्य हेतु ज्येष्ठ अधिक अमावस्या।

15  👉 देव कार्य हेतु सोमवती अमावस्या, पुरूषोत्तम ( अधिक ) मास पूर्ण, संक्रान्ति सूर्य मिथुन में 12:53 से ( पुण्यकाल दोपहर 12:51 से सूर्यास्त तक )।

16  👉 द्वितीय शुद्ध ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष आरम्भ, प्रतिपदा तिथिक्षय, चन्द दर्शन, बुढ़वा मंगल।

17  👉 रम्भा तृतीया व्रत, महाराणा प्रताप जयन्ती।

18  👉 गुरू पुष्य योग सूर्योदय से 11:32 तक विनायक चतुर्थी, रानी झाँसी पुण्यतिथि, गुरू अर्जुन देवशहीदि दिवस।

19  👉 श्रुति पंचमी (जैन)।

20  👉 विन्ध्यवासिनी पूजा, साई टेऊराम पुण्यतिथि, स्कन्द-अरण्य आरोग्य षष्ठी।

21  👉 भानुसप्तमी, विश्व योग दिवस, सूर्य दक्षिणायने वर्षा ऋतु आरम्भ।

22   👉 दुर्गाष्टमी, धूमावती जयन्ती, राष्ट्रीय आषाढ मास आरम्भ, मेलाक्षीर भवानी (कश्मीर)

23  👉 श्री महेश नवमी (माहेश्वर वंशीय), बुढ़वा मंगल।

24   👉 श्री बटुक भैरव जयन्ती, श्री गंगा स्नान, श्री राम शर्मा आचार्य जन्म।

25  👉 भीम-निर्जला एकादशी व्रत ( सबका ), वेद माता गायत्री जन्मोत्सव, रूकमिणि विवाह।

26  👉 चम्पक द्वादशी ( बंगाल )।

27 👉 शनि प्रदोष व्रत, वट सावित्रि व्रत आरम्भ।

29  👉 श्री सत्यनारायण ( पूर्णिमा ) व्रत, स्नान दान हेतु शुद्ध ज्येष्ठ पूर्णिमा,
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संत कबीर जयन्ती, वट सावित्रि व्रत पूर्ण, अमरनाथ यात्रा आरम्भ।
ज्येष्ठ मास में जलदान का विशेष महत्व है। 

भीषण गर्मी के कारण प्यासे मनुष्यों, पशु - पक्षियों तथा गौवंश के लिए जल की व्यवस्था करना महान पुण्य कर्म माना गया है। 

पक्षियों के लिए परिंडा लगाना, वृक्षारोपण करना तथा छायादार वृक्षों की रक्षा करना भी धर्मकार्य माना गया है।

यदि प्रश्नकुंडली में किसी कार्य में बार-बार विघ्न दिखाई दे रहे हों, तो इस मास में भगवान गणेश का पूजन, नवग्रह शांति पाठ, महामृत्युंजय मंत्र का जप तथा योग्य विद्वान ब्राह्मण से परामर्श लेकर शांति अनुष्ठान कराया जा सकता है।

यह भी ध्यान रखना चाहिए कि ग्रह दोषों के उपाय श्रद्धा, संयम और सदाचार के साथ किए जाएँ। 

केवल उपाय करने से नहीं, बल्कि सत्य बोलने, माता-पिता का सम्मान करने, गुरु की सेवा, ईमानदारी, अहिंसा, दान, क्षमा और परोपकार जैसे गुणों को अपनाने से भी ग्रहों का शुभ प्रभाव बढ़ता है।

वैदिक ज्योतिष यह नहीं कहता कि ग्रह मनुष्य का भाग्य पूरी तरह बदल देते हैं, बल्कि यह बताता है कि ग्रह हमारे कर्मों के फल को प्रकट करने के माध्यम हैं। 

इस लिए श्रेष्ठ कर्म, ईश्वर भक्ति और सेवा भाव ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

अंततः ज्येष्ठ मास हमें तप, संयम, जलदान, गौसेवा, शिव - पूजन, विष्णु भक्ति और सूर्य उपासना का संदेश देता है। 

जो व्यक्ति इस पवित्र मास में श्रद्धापूर्वक धर्म, दान और भक्ति का पालन करता है, उसके जीवन में मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति, पारिवारिक सुख तथा ईश्वर की कृपा का अनुभव बढ़ता है। 

जन्मकुंडली और प्रश्नकुंडली में ग्रहों की स्थिति चाहे जैसी भी हो, सच्चे मन से किए गए सत्कर्म, प्रार्थना और ईश्वर के प्रति समर्पण जीवन को प्रकाशमय बनाने की प्रेरणा देते हैं। 
यही ज्येष्ठ मास का वास्तविक महात्म्य और सनातन धर्म का दिव्य संदेश है।
!!!!! शुभमस्तु !!!
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ज्येष्ठ मास :

ज्येष्ठ मास : ज्येष्ठ मास का महत्त्व एवं पर्व त्यौहार : श्री वैदिक ज्योतिषशास्त्रविद्या , श्री खगोलशास्त्रविद्या, श्री ऋग्वेद, श्री यजुर्वेद...

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